श्री राम जानकी बैठे है मेरे सीने मे भजन लीरिक्स


   श्री राम जानकी बैठे है मेरे सीने मे  भारतीय भक्ति संगीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भजन श्री राम और सीता माता की अनंत भक्ति को दर्शाता है, जो हमारे दिलों में गहराई से बैठी हुई है। इस भजन का गहराई से विश्लेषण करना और इसके अर्थ को समझना न केवल हमारी भक्ति को बढ़ाता है, बल्कि हमें राम जी के भजन की आत्मा को भी समझने में मदद करता है। इस लेख में, हम इस भजन के हर एक शेर का विस्तृत विश्लेषण करेंगे और यह जानेंगे कि यह भजन क्यों विशेष है।

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और गहराई में छिपी भक्ति है। यह भजन राम जी और सीता माता की उपासना के लिए समर्पित है और इसमें उनके प्रति अनन्य भक्ति और प्रेम का प्रतीक है। भजन में व्यक्त भावनाएँ और भक्ति की गहराई इसे अन्य भजनों से अलग करती है।

 श्री राम जानकी बैठे है मेरे सीने मे भजन  के बोल



श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने मे, देख लो मेरे दिल के नगीने में ।। – दोहा – ना चलाओ बाण, व्यंग के ऐ विभिषण, ताना ना सह पाऊं, क्यूँ तोड़ी है ये माला, तुझे ए लंकापति बतलाऊं, मुझमें भी है तुझमें भी है, सब में है समझाऊँ, ऐ लंकापति विभीषण, ले देख, मैं तुझको आज दिखाऊं ।। श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में, देख लो मेरे दिल के नगीने में ।। मुझको कीर्ति ना वैभव ना यश चाहिए, राम के नाम का मुझ को रस चाहिए, सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में, श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ।। – दोहा – अनमोल कोई भी चीज, मेरे काम की नहीं, दिखती अगर उसमे छवि, सिया राम की नहीं ।। राम रसिया हूँ मैं, राम सुमिरण करूँ, सिया राम का सदा ही मै चिंतन करूँ, सच्चा आनंद है ऐसे जीने में, श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ।। फाड़ सीना हैं, सब को ये दिखला दिया, भक्ति में मस्ती है, सबको बतला दिया, कोई मस्ती ना, सागर को मीने में, श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ।। श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने मे, देख लो मेरे दिल के नगीने में ।।


भजन का पहला शेर

"श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में" इस शेर में भजनकार ने बताया है कि श्री राम और सीता माता उनके हृदय में निवास करते हैं। यह पंक्ति भक्ति और आध्यात्मिकता के प्रति गहरी श्रद्धा को दर्शाती है। यह भावनात्मक अहसास भजन की आत्मा को स्पष्ट करता है, जिसमें भजनकार की आत्मा में श्री राम और जानकी माता का असीम प्रेम स्पष्ट होता है।

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    श्री राम जानकी बैठे है मेरे सीने मे दोहो  का महत्व

"ना चलाओ बाण, व्यंग के ऐ विभिषण" इस दोहे में भजनकार विभीषण से बात कर रहे हैं, जो लंका के प्रमुख पात्रों में से एक थे। यहां भजनकार विभीषण से अपने दिल की बात कह रहे हैं और उसे यह समझा रहे हैं कि भक्ति के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा से वे नहीं डरते। यह दोहा भजनकार की भक्ति में अडिगता को दर्शाता है।

    श्री राम जानकी बैठे है मेरे सीने मे भजन का मध्यांश

"मुझको कीर्ति ना वैभव ना यश चाहिए" इस भाग में भजनकार ने स्पष्ट किया है कि उन्हें संसारिक धन, यश या वैभव की कोई आवश्यकता नहीं है। वे केवल राम के नाम का रस और भक्ति की मिठास चाहते हैं। यह भजनकार के निर्विवाद भक्ति भाव को दर्शाता है।

    श्री राम जानकी बैठे है मेरे सीने मे भजन का अंतिम शेर

"फाड़ सीना हैं, सब को ये दिखला दिया" इस शेर में भजनकार ने अपने भक्ति भाव की शक्ति को दर्शाया है। यह दर्शाता है कि भक्ति के रास्ते में उन्होंने अपने दिल की गहराई से श्री राम और सीता माता की पूजा की है और इसे दिखाने में किसी भी तरह की संकोच नहीं है।

भजन के माध्यम से भक्ति की अभिव्यक्ति

इस भजन के माध्यम से भक्ति की गहराई को समझना महत्वपूर्ण है। भजनकार ने श्री राम और सीता माता के प्रति अपनी भावनाओं को सरल लेकिन प्रभावी ढंग से व्यक्त किया है। राम भजन लिरिक्स में दर्शाया गया भावनात्मक संबंध भक्ति की सही दिशा को दर्शाता है, जो किसी भी भक्त के लिए प्रेरणा का स्रोत हो सकता है।

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निष्कर्ष

श्री राम जानकी भजन भारतीय भक्ति संगीत का एक अनमोल रत्न है। इसके माध्यम से भक्ति और प्रेम की गहराई को समझा जा सकता है। यह भजन हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल सांसारिक यश और धन से परे होती है, बल्कि यह आध्यात्मिक समर्पण और भक्ति की गहराइयों में बसी होती है।

यदि आप श्री राम जानकी भजन को गहराई से समझना और भक्ति के मार्ग पर चलना चाहते हैं, तो इस भजन को ध्यान से सुनें और इसके अर्थ को आत्मसात करें। इससे न केवल आपकी भक्ति की गहराई बढ़ेगी, बल्कि आप आध्यात्मिक रूप से भी समृद्ध होंगे।

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